एयर प्यूरीफायर को मेडिकल डिवाइस की श्रेणी में लाने और इन पर लगे 18 फीसदी जीएसटी को घटाकर 5 फीसदी करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है. लेकिन विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट ने केंद्र सरकार को 10 दिन का समय दे दिया है. जस्टिस अमित महाजन और जस्टिस विनोद कुमार की बेंच 9 जनवरी को याचिका पर अगली सुनवाई करेगा.
सोची समझी जनहित याचिका
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी की दर 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करने की मांग वाली याचिका का विरोध किया है. कोर्ट ने जीएसटी घटाने की मांग का विरोध करते हुए कहा कि इससे बवाल मच जाएगा, यह एक सोची समझी जनहित याचिका है. यह याचिका साजिश के तहत दाखिल की गई है.
एयर प्यूरीफायर पर टैक्स कम करने की मांग
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि जब राजधानी में हवा की स्थिति इमरजेंसी जैसी बनी हुई है, तो एयर प्यूरीफायर पर 18 फीसदी जीएसटी क्यों लगाया जा रहा है. कोर्ट ने कहा था कि अगर सरकार लोगों को साफ हवा उपलब्ध नहीं करा पा रही है तो कम से कम एयर प्यूरीफायर पर टैक्स कम कर दें.
काउंसिल सिस्टम को किया नजरअंदाज
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि मामले की सबसे ऊंचे लेवल पर जांच की जा रही है, लेकिन उसने सोच-समझकर जवाब देने के लिए और समय की मांग की. एएसजी एन वेंकटरमन ने कहा कि अगर इस मामले में जीएसटी काउंसिल के सिस्टम को नजरअंदाज किया गया, तो यह एक मुश्किल स्थिति बन सकती है, जिसमें सही प्रोसेस को फॉलो किए बिना और जीएसटी छूट मांगी जा सकती है.
उन्होंने कहा कि इससे मुश्किल स्थिति बन जाएगी या नहीं. इसमें संविधान का मामला शामिल है. इससे पहले कोर्ट ने 24 दिसंबर को जीएसटी काउंसिल से इस प्रस्ताव पर विचार करने के लिए एक अर्जेन्ट मीटिंग बुलाने को कहा था.
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-भारत एक्सप्रेस
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