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मथुरा-वृंदावन ही नहीं, भारत की इन 6 जगहों पर भी चढ़ता है होली का अनोखा खुमार; एक बार गए तो भूल नहीं पाएंगे!

होली मतलब सिर्फ रंग-गुलाल नहीं, बल्कि संस्कृति का उत्सव है. अगर आप मथुरा-वृंदावन की भीड़ से बचकर कुछ नया अनुभव करना चाहते हैं, तो हमने आपके लिए 6 ऐसी जगहों की लिस्ट तैयार की है जहाँ की होली शाही परंपराओं, वीरता के करतबों और रूहानी सुकून के लिए जानी जाती है.

Holi 2026: होली का नाम आते ही जेहन में सबसे पहले मथुरा की गलियां और वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर की भीड़ याद आती है. बेशक वहां की होली का कोई सानी नहीं है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश के अलग-अलग कोनों में होली खेलने के ऐसे अनूठे तरीके हैं, जिन्हें देखकर आप दांतों तले उंगली दबा लेंगे? अगर आप इस साल वही पुराने घिसे-पिटे तरीके से हटकर कुछ ‘हटके’ एक्सपीरियंस करना चाहते हैं, तो अपना बैग पैक कर लीजिए. हम आपको बता रहे हैं भारत की वो 6 जगहें, जहां की होली आपकी जिंदगी की सबसे बेहतरीन याद बन सकती है.

जयपुर

राजस्थान की राजधानी जयपुर में होली का मतलब सिर्फ रंग नहीं, बल्कि ‘रॉयल ट्रीट’ है. यहां की होली में आपको राजपूती शानो-शौकत की झलक मिलेगी. शहर के सिटी पैलेस से लेकर बड़े-बड़े हेरिटेज होटलों में लोक संगीत और ‘कच्ची घोड़ी’ जैसे पारंपरिक नृत्यों का आयोजन होता है. अगर आप रंगों के साथ-साथ राजस्थानी संस्कृति और लजीज व्यंजनों का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो जयपुर से बेहतर कुछ नहीं.

शांतिनिकेतन

पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में होली को ‘बसंत उत्सव’ के तौर पर मनाया जाता है. इसकी शुरुआत खुद गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने की थी. यहां की होली बहुत ही शालीन और सांस्कृतिक होती है. पीले कपड़ों में सजे छात्र-छात्राएं जब रबींद्र संगीत पर नृत्य करते हैं, तो ऐसा लगता है मानो पूरी प्रकृति ही उत्सव मना रही हो. यह रंगों के साथ कला और संगीत का एक खूबसूरत संगम है.

आनंदपुर साहिब का ‘होला मोहल्ला’

अगर आप होली में कुछ एडवेंचर और रोमांच देखना चाहते हैं, तो पंजाब के आनंदपुर साहिब पहुंचिए. यहां होली के अगले दिन ‘होला मोहल्ला’ मनाया जाता है. यह त्योहार सिखों की वीरता का प्रदर्शन है. निहंग सिख घोड़े पर सवार होकर तलवारबाजी और ‘गतका’ (पारंपरिक युद्धकला) के ऐसे करतब दिखाते हैं कि आप पलकें झपकाना भूल जाएंगे. यह नजारा रूह को जोश से भर देने वाला होता है.

झीलों के शहर में राजसी होली

उदयपुर की होली भी जयपुर की तरह शाही होती है, लेकिन यहां का माहौल थोड़ा ज्यादा रूमानी और शांत होता है. सिटी पैलेस में शाही परिवार की मौजूदगी में होलिका दहन और पारंपरिक रस्में निभाई जाती हैं. विदेशी पर्यटकों के लिए यह जगह जन्नत जैसी है, जहां ढोल-नगाड़ों के बीच झीलों के किनारे गुलाल उड़ता है.

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वाराणसी का मसान होली

काशी की होली का मिजाज ही अलग है. यहां की ‘मसान होली’ दुनिया भर में मशहूर है, जहां चिता की भस्म से होली खेली जाती है. इसके अलावा गंगा घाटों पर सुबह की आरती के बाद जब हुड़दंग शुरू होता है, तो पूरा शहर ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों और रंगों में सराबोर हो जाता है. गंगा में नाव की सवारी करते हुए घाटों पर उड़ते गुलाल को देखना किसी जादू से कम नहीं है.

बरसाना और नंदगांव

भले ही ये ब्रज का हिस्सा हैं, लेकिन इनका अंदाज सबसे निराला है. बरसाना की ‘लठमार होली’ में महिलाएं लाठियां लेकर निकलती हैं और पुरुष ढाल से अपना बचाव करते हैं. यह हंसी-ठिठोली और प्रेम का वो उत्सव है जो सीधे द्वापर युग की याद दिलाता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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