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स्वामी सतीशाचार्य जी महाराज से मिले RSS प्रमुख मोहन भागवत, विकसित भारत 2047 और राष्ट्रधर्म पर हुई खास चर्चा

RSS Chief Mohan Bhagwat: RSS प्रमुख मोहन भागवत ने जगद्गुरु स्वामी सतीशाचार्य जी महाराज से मुलाकात की. उनका वहां राष्ट्रधर्म, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और मिशन विकसित भारत 2047 पर गहन मंथन हुआ.

Mohan Bhagwat
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

नई दिल्ली, 3 मार्च 2026: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने जगद्गुरु स्वामी सतीशाचार्य जी महाराज के आश्रम में मुलाकात की. यह मिलन राष्ट्रधर्म, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और मिशन विकसित भारत 2047 पर गहन विचार-विमर्श के लिए हुई. संतों, विद्वानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में यह बैठक बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

विकसित भारत का सही मतलब

बातचीत में स्वामी सतीशाचार्य जी महाराज ने कहा कि विकसित भारत का मतलब सिर्फ आर्थिक तरक्की नहीं है. बल्कि इसमें आध्यात्मिक जागृति, सांस्कृतिक गौरव, नैतिक शिक्षा और आत्मनिर्भर समाज का पूरा विकास शामिल होना चाहिए. उन्होंने जोर दिया कि युवाओं को संस्कारित, संगठित और राष्ट्र के प्रति समर्पित करना जरूरी है. तभी भारत वैश्विक नेतृत्व हासिल कर पाएगा.

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भारत की सांस्कृतिक जड़ों पर जोर

मोहन भागवत ने कहा कि भारत का पुनरुत्थान उसकी सांस्कृतिक जड़ों में ही छिपा है. उन्होंने भारतीय संस्कृति की ताकत बताई, जैसे योग, अध्यात्म, गीता के सिद्धांत और वेदांत. इनके जरिए दुनिया में भारत की भूमिका मजबूत हो सकती है. बैठक में सामाजिक सद्भाव को राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी बताया गया.

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युवा शक्ति और समाज सुधार

दोनों नेताओं ने युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण का आधार माना. शिक्षा, कौशल विकास, चरित्र निर्माण और सांस्कृतिक प्रशिक्षण पर फोकस करने की बात हुई. स्वामी जी ने अपने आश्रम के काम बताए, जैसे मुफ्त स्कूल, गो संरक्षण केंद्र और परिवार प्रबंधन कार्यक्रम. इनसे लाखों परिवारों पर अच्छा असर पड़ रहा है. सनातन मूल्यों, परिवार व्यवस्था और स्वदेशी सोच को बचाने पर सहमति बनी.

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सहयोग और सकारात्मक संवाद

बैठक में तय हुआ कि समाज के सभी वर्गों में सकारात्मक संवाद और सहयोग बढ़ाया जाएगा. भारत को सिर्फ भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि जीवंत सांस्कृतिक चेतना माना गया. इसे मजबूत करना सबका कर्तव्य है. वेद मंत्रों, फूलों की वर्षा और पारंपरिक स्वागत के बीच यह मिलन युगप्रेरक बताया गया.

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राष्ट्रीय उत्थान के लिए संकल्प

यह मुलाकात आध्यात्मिक नेतृत्व और संगठनात्मक शक्ति के समन्वय का प्रतीक है. दोनों पक्षों ने राष्ट्र प्रगति, सामाजिक सद्भाव और वैश्विक शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना की. यह कदम भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को और मजबूत करता है.

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