इस बार 16 दिनों तक रहेंगे श्राद्ध
Pitru Paksha: जगतपिता ब्रह्मा की पावन नगरी और ‘तीर्थ गुरु’ के रूप में विख्यात राजस्थान के पुष्कर में पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. अश्विन माह के 15 दिवसीय पितृपक्ष में पुष्कर सरोवर के ऐतिहासिक 52 घाटों पर देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त अनुष्ठान करने पहुंच रहे हैं. मान्यता है कि इस पावन धाम पर किया गया पिंडदान सीधे पितरों को तृप्ति, शांति और मोक्ष दिलाता है.
श्रीराम ने भी किया था पिता दशरथ का तर्पण
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने वनवास काल के दौरान माता सीता और अनुज लक्ष्मण के साथ पुष्कर तीर्थ में आकर अपने पिता महाराज दशरथ का श्राद्ध किया था. प्रभु श्रीराम ने पवित्र सरोवर के जल और बालू से पिंड बनाकर दशरथ जी का तर्पण किया था. इसी प्रसंग के चलते पुष्कर के पावन जल में पितृ कर्म करने की परंपरा युगों से चली आ रही है.
ब्रह्मा, वराह और गौ घाट पर विशेष अनुष्ठान
पुष्कर सरोवर के कुल 52 घाट धार्मिक रूप से अत्यंत पूजनीय हैं, जिनमें ब्रह्मा घाट, वराह घाट और गौ घाट प्रमुख हैं. श्रद्धालु इन घाटों पर आस्था की डुबकी लगाकर पुरोहितों के सानिध्य में तिलांजलि, पिंडदान और तर्पण करते हैं. सरोवर की उत्पत्ति को लेकर मान्यता है कि ब्रह्मा जी के हाथ से गिरा कमल का पुष्प यहां गिरा था, जिसके बाद इस पवित्र जल तीर्थ का प्राकट्य हुआ.
पद्म पुराण में वर्णित है पुष्कर श्राद्ध की महिमा
पद्म पुराण में भी पुष्कर तीर्थ में किए जाने वाले पितृ कर्म की विशेष महत्ता बताई गई है. इसके अनुसार, पुष्कर में श्रद्धापूर्वक अर्पित किया गया एक पिंड भी पूर्वजों को जन्म-मरण के बंधन से मुक्त कर उच्च लोकों की प्राप्ति कराता है. पितरों की आत्मा के कल्याण और पूर्वजों के आशीर्वाद की कामना के साथ प्रतिदिन यहां घाटों पर भक्तों का तांता लगा रहता है.
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