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आजादी से पहले इन 5 दिग्गज खिलाड़ियों ने दुनिया भर में बजाया था भारत का डंका

15 अगस्त 1947 को मिली आजादी से बहुत पहले भी हमारे देश के कई जांबाज खिलाड़ियों ने दुनिया भर में भारत का डंका बजाया था. आइए जानते हैं ऐसे ही 5 महान खिलाड़ियों के बारे में, जिन्होंने गुलामी के दौर में भी देश का सिर गर्व से ऊंचा किया.

Independence Day 2026, Sports

Independence Day 2026: आज देश अपनी आजादी के 79 साल पूरे कर चुका है. इन सात दशकों से ज्यादा के सफर में भारत ने दुनिया भर में अपनी एक अलग ही धाक जमाई है. आज चाहे दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की बात हो या फिर सबसे बड़े लोकतंत्र की, भारत हर जगह सबसे आगे खड़ा है. खेल की दुनिया में भी आज हमारे खिलाड़ी तिरंगे का मान पूरी दुनिया में बढ़ा रहे हैं.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि 15 अगस्त 1947 को मिली आजादी से बहुत पहले भी हमारे देश के कुछ ऐसे जांबाज खिलाड़ी थे, जिन्होंने पूरी दुनिया में भारत का डंका बजा दिया था? आइए आज आपको ऐसे ही 5 महान खिलाड़ियों के बारे में बताते हैं, जिन्होंने अंग्रेजों की गुलामी के दौर में भी देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया था.

नॉर्मन प्रिचार्ड

ओलंपिक में भारत के लिए पहला मेडल जीतने का श्रेय नॉर्मन प्रिचार्ड को जाता है. कलकत्ता में साल 1875 में जन्मे ब्रिटिश मूल के इस एथलीट ने 1900 के पेरिस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था. उन्होंने 200 मीटर स्प्रिंट और 200 मीटर हर्डल्स रेस में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो सिल्वर मेडल अपने नाम किए थे. भले ही वो मूल रूप से अंग्रेज थे, लेकिन इतिहास में उनके ये दोनों मेडल भारत के खाते में ही दर्ज हैं. उनके इस कमाल के पूरे 121 साल बाद टोक्यो ओलंपिक में नीरज चोपड़ा ने एथलेटिक्स में देश को दूसरा मेडल दिलाया था.

मेजर ध्यान चंद

हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यान चंद का नाम भला कौन नहीं जानता. उनका जलवा आजादी से पहले भी सिर चढ़कर बोलता था और आज भी खेल इतिहास में उनका मुकाबला कोई नहीं कर सकता. ध्यान चंद ने अपनी हॉकी स्टिक के जादू से भारत को 1928, 1932 और 1936 के लगातार तीन ओलंपिक खेलों में गोल्ड मेडल जिताए थे. बर्लिन ओलंपिक के फाइनल में तो उन्होंने जर्मनी के तानाशाह हिटलर के सामने ही हैट्रिक जड़कर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था.

कर्नल सीके नायडू

भारत में जब क्रिकेट अपनी शुरुआती दौर में था, तब देश को अपनी पहली पहचान दिलाने वाले थे कर्नल सीके नायडू. साल 1932 में जब भारत ने लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर अपना पहला टेस्ट मैच खेला था, तो टीम की कमान सीके नायडू के ही हाथों में थी. उन्होंने अपने फर्स्ट क्लास करियर में रनों का पहाड़ खड़ा करते हुए 11 हजार से ज्यादा रन बनाए और 400 से अधिक विकेट भी झटके थे.

लाला अमरनाथ

भारतीय क्रिकेट में जब भी महान ऑलराउंडर्स की बात होती है, तो लाला अमरनाथ का नाम सबसे पहले जेहन में आता है. साल 1933 में इंग्लैंड के खिलाफ अपना डेब्यू करते ही उन्होंने इतिहास रच दिया था. बॉम्बे टेस्ट में उन्होंने शानदार 118 रनों की पारी खेली और टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने. इतना ही नहीं, आगे चलकर वो आजाद भारत के पहले कप्तान भी बने थे.

कैप्टन रूप सिंह

मेजर ध्यान चंद के छोटे भाई कैप्टन रूप सिंह ने भी भारतीय हॉकी को बुलंदियों पर पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. वो 1932 और 1936 के ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय टीम का अहम हिस्सा रहे थे. अमेरिका के खिलाफ 1932 के ऐतिहासिक मुकाबले में जहां ध्यान चंद ने 8 गोल दागे थे, वहीं रूप सिंह ने अकेले 10 गोल दागे थे. आज भी ओलंपिक इतिहास में किसी एक मैच में सबसे ज्यादा गोल करने का यह रिकॉर्ड उन्हीं के नाम दर्ज है.

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-भारत एक्सप्रेस



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