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Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए विधेयक को मंजूरी देने की समय सीमा और उनके अधिकारों पर बहस जारी है. केंद्र सरकार और वरिष्ठ वकीलों ने संविधान के अनुच्छेद 200, 201, 32, 163 और 361 के दायरे पर बहस किया.

गैंगस्टर से राजनेता बने अरुण गवली को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है. 2007 में शिवसेना पार्षद की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे गवली को अदालत ने 17 साल जेल में रहने और उनकी उम्र को देखते हुए राहत दी है.

नीट-पीजी 2025 को लेकर विवाद और गहरा गया है. डॉक्टर उपेंद्र यादव व अन्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल की गई है. याचिका में उत्तर कुंजी की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए NBEMS की अधिसूचना को चुनौती दी गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को बड़ा झटका देते हुए आदेश दिया कि आरोपी को जेल में रखने के लिए बार-बार नई एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भविष्य में किसी भी नई प्राथमिकी में गिरफ्तारी के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति जरूरी होगी.

दिल्ली हाईकोर्ट 10 दिसंबर को उस याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें दिल्ली में पंचायत राज अधिनियम 1954 को लागू करने की मांग की गई है. कोर्ट ने सभी पक्षों को दिल्ली के विधायी इतिहास पर नोट जमा करने का निर्देश दिया है.

Legal News: सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विपुल मनुभाई पंचोली को देश के सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है.

भारत के राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट में दो नए जजों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. राष्ट्रपति ने बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस आलोक अराधे और पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस विपुल एम. पंचोली को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया है.

जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड के बाद न्यायपालिका पर एक और बड़ा आरोप लगा है. सूत्रों के मुताबिक एनसीएलएटी के सदस्य जस्टिस शरद कुमार शर्मा ने चौकाने वाला दावा किया है.

उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर कुछ सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और कार्यकर्ताओं के राजनीतिक बयानों का विरोध करते हुए पूर्व न्यायाधीशों ने ओपन लेटर जारी किया हैं.

राष्ट्रपति द्वारा विधेयकों पर मंजूरी की समय-सीमा तय करने से जुड़े 14 सवालों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. सीजेआई बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अगर राष्ट्रपति और राज्यपाल अनिश्चितकाल तक बैठे रहें तो क्या अदालत शक्तिहीन हो जाएगी?