UP Property Registry Rules 2026: उत्तर प्रदेश में अगर आप कोई पारिवारिक संपत्ति बेचने या अपने किसी रिश्तेदार के नाम रजिस्ट्री कराने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. यूपी सरकार ने रजिस्ट्री के नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है. अब रजिस्ट्री दफ्तरों में आधार कार्ड को सिर्फ आपकी पहचान और पते के सबूत के तौर पर देखा जाएगा. आधार कार्ड के पीछे लिखे माता-पिता या पति-पत्नी के नाम को अब कानूनी तौर पर ‘पारिवारिक रिश्ते’ का सबूत नहीं माना जाएगा. आईजी रजिस्ट्रेशन नेहा शर्मा ने इस संबंध में सख्त आदेश जारी कर दिए हैं.
क्यों पड़ी इस नए नियम की जरूरत?
अक्सर देखा जाता है कि पारिवारिक संपत्तियों के लेन-देन या वसीयत के समय कानूनी वारिसों और उनके आपसी रिश्तों की पुष्टि करना जरूरी होता है. पहले लोग इसके लिए आधार कार्ड पर छपे नाम दिखा देते थे और काम चल जाता था. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.
दरअसल, खुद भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने साफ किया है कि आधार कार्ड सिर्फ किसी व्यक्ति की पहचान का जरिया है, वह पारिवारिक संबंधों को प्रमाणित करने वाला दस्तावेज नहीं है. इसी गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए यूपी के निबंधन विभाग ने यह फैसला लिया है ताकि भविष्य में होने वाले किसी भी प्रॉपर्टी विवाद या फर्जीवाड़े को रोका जा सके.
अब कौन से कागज होंगे जरूरी?
नए नियमों के मुताबिक, अगर आपको रजिस्ट्री दफ्तर में अपना पारिवारिक संबंध या उत्तराधिकार साबित करना है, तो आधार के अलावा सरकार द्वारा जारी अन्य वैध दस्तावेज दिखाने होंगे. अब से रिश्ता सत्यापित करने के लिए ये कागजात जरूरी होंगे:
- जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)
- परिवार रजिस्टर की नकल
- उत्तराधिकारी संबंधी कानूनी अभिलेख (Succession Documents)
खरीदार और विक्रेता रखें इस बात का ध्यान
इस आदेश के बाद अब प्रॉपर्टी का लेन-देन करने वाले लोगों को सलाह दी जाती है कि वे रजिस्ट्री दफ्तर जाने से पहले अपने सभी अपडेटेड और सरकारी प्रमाण पत्र साथ रख लें. अगर आप केवल आधार कार्ड के भरोसे जाएंगे, तो आपकी रजिस्ट्री अटक सकती है.
-भारत एक्सप्रेस
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