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जीवन रक्षक से सुरक्षा प्रहरी तक: भारतीय तटरक्षक के 50 गौरवशाली वर्ष

भारतीय तटरक्षक बल अपने स्थापना दिवस पर स्वर्ण जयंती वर्ष मना रहा है. 1976 में सीमित संसाधनों से शुरू हुआ यह बल आज समुद्री सुरक्षा, जीवन रक्षा अभियानों और राष्ट्र की समुद्री सीमाओं की रक्षा में एक मजबूत स्तंभ बन चुका है. पांच दशकों में आईसीजी ने साहस, सेवा और आधुनिकता की नई मिसाल कायम की है.

Indian Coast Guard
Edited by Vaibhav Gupta

आज भारतीय तटरक्षक (आईसीजी) अपने स्थापना दिवस की 50 वीं वर्षगांठ मना रहा है. यह अवसर पूरे राष्ट्र के लिए गौरव का क्षण है, जो समुद्री सीमाओं की रक्षा, जीवन रक्षा अभियानों और राष्ट्र की सुरक्षा में समर्पित सेवा के पांच दशकों को चिह्नित करता है.

प्रारंभिक यात्रा

भारतीय तटरक्षक की स्थापना 1 फरवरी 1976 को हुई थी. शुरुआत में मात्र सात सतह प्लेटफॉर्म्स के साथ यह एक छोटा-सा बल था, जो मुख्य रूप से तटीय सुरक्षा, खोज एवं बचाव (एसएआर) और समुद्री कानून प्रवर्तन के लिए जिम्मेदार था. आजादी के बाद बढ़ते समुद्री खतरे और विस्तारित तटीय रेखा के मद्देनजर इसकी आवश्यकता महसूस की गई. प्रारंभिक वर्षों में सीमित संसाधनों के बावजूद आईसीजी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जैसे विदेशी मछली पकड़ने वाली नौकाओं को रोकना और तस्करी पर अंकुश लगाना.

विकास की यह यात्रा रोमांचक रही है. आज यह बल विश्व के सबसे बड़े तटरक्षक बलों में से एक बन चुका है, जिसमें 155 जहाज और 80 विमान शामिल हैं.

जीवन रक्षक से सुरक्षा प्रहरी तक

पिछले पांच दशकों में आईसीजी ने असंख्य उपलब्धियां हासिल की हैं. इसने हजारों जीवन बचाए हैं और समुद्री डकैती, नशीली दवाओं की तस्करी, अवैध मछली पकड़ने तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में अभूतपूर्व भूमिका निभाई है. 1999 में पनामा पंजीकृत जापानी कार्गो जहाज के अपहरण की सफल पुनर्प्राप्ति जैसी घटनाएं इसके साहस की मिसाल हैं.

हाल के वर्षों में कोविड महामारी के दौरान चिकित्सा आपूर्ति पहुंचाने और तटीय समुदायों की सहायता में अग्रणी भूमिका निभाई. ‘सागर’ (सुरक्षा और विकास के लिए समुद्री पड़ोस) नीति के तहत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने में भी यह बल महत्वपूर्ण रहा है.

भविष्य की योजनाएं

आईसीजी 2030 तक 200 सतह प्लेटफॉर्म्स और 100 विमानों का लक्ष्य हासिल करने के लिए तैयार है. नई पीढ़ी के अपतटीय गश्ती जहाज (ओपीवी), तेज गति वाली नौकाएं और उन्नत ड्रोन प्रणालियां इस विस्तार का हिस्सा हैं. पर्यावरणीय निगरानी, जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियां और साइबर सुरक्षा जैसे उभरते खतरे इसकी प्राथमिकताएं हैं.

राष्ट्र की अटूट ढाल

भारतीय तटरक्षक केवल एक बल नहीं, बल्कि राष्ट्र की समुद्री सीमाओं का प्रहरी है, जो ‘नाव दुर्गम गम न पारे’ के सिद्धांत पर चलता है. 50 वर्षों की यह यात्रा साहस, नवाचार और सेवा की मिसाल है. जैसे-जैसे भारत वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है, आईसीजी की भूमिका और मजबूत होगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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