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विशेष

23 जून 1985 को एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ अटलांटिक महासागर के ऊपर हुए भीषण बम विस्फोट में नष्ट हो गई थी.

23 जून 1757 का प्लासी का युद्ध केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि भारत के इतिहास का वह निर्णायक मोड़ था जिसने ईस्ट इंडिया कंपनी को व्यापार से सत्ता तक पहुंचा दिया.

22 जून 1986 को फुटबॉल इतिहास का सबसे चर्चित 'हैंड ऑफ गॉड' गोल हुआ था. मेक्सिको विश्व कप में अर्जेंटीना के डिएगो मराडोना ने इंग्लैंड के खिलाफ हाथ से गोल कर अपनी टीम को जीत दिलाई थी.

डॉ. कमला सोहनी भारत की पहली महिला वैज्ञानिक थीं जिन्होंने विज्ञान विषय में पीएचडी हासिल कर इतिहास रचा है.

World Desertification Day: विश्व मरुस्थलीकरण दिवस पर प्रसिद्ध पर्यावरणविद् पीपल बाबा की नई किताब 'पीपल की छांव में' लॉन्च हुई है. ढाई करोड़ से अधिक पेड़ लगा चुके पीपल बाबा की यह किताब बंजर धरती को हरा-भरा बनाने और सूखा संकट से निपटने का एक बड़ा संदेश देती है.

इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊँगा’ ने एक बार फिर 1947 के विभाजन के उस दर्द को ताजा कर दिया है, जिसे लाखों लोगों ने अपनी जिंदगी में झेला था.

साल 1991 का आर्थिक संकट भारत के इतिहास का वह मोड़ था, जब देश का विदेशी मुद्रा भंडार मात्र दो हफ्ते के आयात जितना बचा था. दिवालिया होने से बचने के लिए भारत को बैंक ऑफ इंग्लैंड और स्विस बैंक में 67 टन सोना गिरवी रखना पड़ा था.

12 जून 1975 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ने एक ऐतिहासिक फैसले में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के 1971 के रायबरेली चुनाव को रद्द कर दिया था. राज नारायण की याचिका पर आए इस फैसले में इंदिरा पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप सही पाया गया और उन पर 6 साल का प्रतिबंध लगा दिया गया.

खान सर और कोचिंग संस्थाओं को लेकर जारी बहस के बीच, बिहार कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी अभयानंद की आत्मकथा 'असीम' का यह अंश 'सुपर-30' की शुरुआत की एक अलग कहानी सामने लाता है. इसमें अभयानंद बताते हैं कि किस तरह आनंद कुमार के साथ मिलकर उन्होंने आर्थिक रूप से वंचित लेकिन मेधावी छात्रों के लिए इस पहल की नींव रखी थी. आज जब कोचिंग संस्थानों की भूमिका और उनके सामाजिक प्रभाव पर सवाल उठ रहे हैं, तब 'सुपर-30' की इस शुरुआती यात्रा को उसके सह-संस्थापक की नज़र से पढ़ना दिलचस्प भी है और प्रासंगिक भी.

मजदूर नेता नारायण मेघाजी लोखंडे के 7 साल के कड़े आंदोलन के बाद, आखिरकार 10 जून 1890 के प्रस्ताव को मानते हुए अंग्रेजी हुकूमत को झुकना पड़ा और रविवार को आधिकारिक तौर पर देश का पहला साप्ताहिक अवकाश घोषित किया गया.