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वर्ल्ड वॉच लिस्ट रिपोर्ट अलर्ट: पाकिस्तान में हिंदुओं पर ही नहीं इसाइंयो पर भी हो रहा है अत्याचार

पाकिस्तान में ईसाई समुदाय आज भी भेदभाव, हिंसा और जबरन धर्मांतरण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है. वर्ल्ड वॉच लिस्ट 2026 की रिपोर्ट ने एक बार फिर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं.

Christian persecution in Pakistan

World Watch List 2026: पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर ईसाई समुदाय की स्थिति एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बनी है. एक ताजा वैश्विक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वहां ईसाई आज भी भेदभाव, हिंसा, जबरन धर्मांतरण, बंधुआ मजदूरी और लैंगिक उत्पीड़न जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं. सबसे चिंताजनक बात यह है कि इतने गंभीर हालात के बावजूद राज्य की ओर से उन्हें प्रभावी सुरक्षा या न्याय मिलता नजर नहीं आ रहा है.

ईसाइयों के बिगड़े हालात

वैश्विक ईसाई अधिकार संगठन द्वारा जारी वर्ल्ड वॉच लिस्ट 2026 के मुताबिक, पाकिस्तान लगातार उन देशों में शामिल है जहां ईसाइयों के लिए हालात सबसे ज्यादा खतरनाक हैं. इस सूची में पाकिस्तान को 50 देशों में 8वां स्थान दिया गया है. यानी दुनिया भर में जहां ईसाइयों पर अत्याचार का आकलन किया गया, वहां पाकिस्तान अब भी शीर्ष 10 सबसे खराब देशों में बना हुआ है.

यूरोप में उठा पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का मुद्दा

27 जनवरी 2026 को ब्रसेल्स में यूरोपीय संसद में आयोजित एक उच्चस्तरीय कार्यक्रम के दौरान इस रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया. कार्यक्रम में विभिन्न सांसदों और मानवाधिकार विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर खुलकर चर्चा हुई.

इस दौरान पाकिस्तान के अल्पसंख्यक अधिकार कार्यकर्ता जोसेफ जान्सन ने बेहद गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि कागजों पर कानून बनने के बावजूद जमीनी हकीकत नहीं बदल रही है. उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि मई 2025 में इस्लामाबाद क्षेत्र में बाल विवाह पर रोक लगाने वाला कानून पारित किया गया, जिसमें शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल तय की गई. लेकिन इसके बाद भी अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और अपहरणकर्ताओं से शादी कराए जाने की घटनाएं थमी नहीं हैं.

कानून है, लेकिन न्याय नहीं

जान्सन ने आरोप लगाया कि ऐसे मामलों में अदालतें अक्सर नागरिक कानूनों की जगह धार्मिक कानूनों का सहारा लेती हैं, जिससे पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिल पाता. उन्होंने पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग पर भी गहरी चिंता जताई. उनके मुताबिक, झूठे आरोप लगाकर ईसाइयों को निशाना बनाया जाता है, जिसके बाद भीड़ हिंसा, चर्चों पर हमले और बिना सजा के वर्षों तक जेल में बंद रहने जैसी स्थितियां बन जाती हैं.

उन्होंने 2023 में हुए जरनवाला हमलों का जिक्र करते हुए बताया कि वहां कम से कम 26 चर्च जला दिए गए थे, लेकिन अब तक किसी भी दोषी को सजा नहीं मिली. यह दंडमुक्ति का माहौल और डर को और गहरा करता है.

कट्टरपंथ और सरकारी निष्क्रियता

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कट्टरपंथी संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न होने से हालात और बिगड़ रहे हैं. कई धार्मिक कैदी आज भी जेलों में बंद हैं, पीड़ित परिवार न्याय के इंतजार में हैं और सरकार की निष्क्रियता सवालों के घेरे में है.

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-भारत एक्सप्रेस



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