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बिहार में स्थाई सरकार और G20 में भारत की भूमिका से जल्दी रिकार्ड बनाएगा शेयर बाजार

भारत की अर्थव्यवस्था इस समय रिकॉर्ड गति से बढ़ रही है. G20 सम्मेलन में भारत की सक्रिय भूमिका और बिहार में स्थाई सरकार बनने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है.

भारत की अर्थव्यवस्था इस समय रिकॉर्ड रफ्तार से आगे बढ़ रही है. एक तरफ जीडीपी ग्रोथ 7.8% की नई ऊंचाई छू रही है, तो दूसरी तरफ सेंसेक्स 85 हज़ार के पार और निफ्टी 26 हज़ार से ऊपर टिके रहने में कामयाब हो रहा है. G20 सम्मेलन में भारत की बढ़ती भूमिका और बिहार में स्थाई सरकार बनने के बाद निवेशकों का विश्वास और मजबूत हुआ है. शेयर मार्केट और आर्थिक मामलों की जानकारों का दावा है कि भारत के आर्थिक शक्ति बनने के लिए मजबूत संकेत हैं.

भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर दुनिया का ध्यान खींच रही है. जीडीपी में मजबूत बढ़त और जीएसटी कलेक्शन में छूट के बावजूद रिकॉर्ड उछाल ने बाज़ार को नई ऊर्जा दी है. शेयर मार्केट में सेंसेक्स 85 हज़ार के पार और निफ्टी 26 हज़ार से ऊपर कारोबार कर रहा है जो निवेशकों की बढ़ती उम्मीदों का संकेत माना जा रहा है. आर्थिक मजबूती का एक कारण है भारत की ग्लोबल पोज़िशनिंग. G20 सम्मेलन में भारत की सक्रिय भूमिका ने विदेशी निवेशकों के भरोसे को और बढ़ाया है. वहीं बिहार में स्थाई सरकार बनने से आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता का मैसेज मार्केट में गया है.

निवेशकों की उम्मीदें हुई मजबूत

शेयर मार्केट के एक्सपर्ट अभिषेक सिन्हा का कहना है कि बिहार में स्थाई सरकार आने और G20 में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा भारत की तरफ से मजबूती से पक्ष रखने का सीधा असर विदेशी निवेश पर दिख रहा है. निवेश लगातार बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह और तेज़ी से बढ़ेगा. शेयर मार्केट में रिकॉर्ड हाइट्स देखने को मिलेंगी.

आर्थिक मामलों की जानकारी आकाश जिंदल का मानना है कि जब विकसित देशों की GDP माइनस में जा रही है, भारत 7.8% की दर से बढ़ रहा है. यही कारण है कि ग्लोबल कंपनियां अब भारत को सबसे भरोसेमंद अर्थव्यवस्था मान रही हैं. मार्केट में उछाल आगे भी जारी रहने के पूरे संकेत हैं.

जल्द 5 ट्रिलियन होगी भारत की इकोनामी

भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता और मजबूत घरेलू मांग भी मार्केट की रफ्तार का बड़ा कारण बनी हुई है. विशेषज्ञों का दावा है कि आने वाले महीनों में सेंसेक्स और निफ्टी नए रिकॉर्ड स्तर छू सकते हैं. भारत की मजबूत आर्थिक नीतियों, राजनीतिक स्थिरता और बढ़ते विदेशी निवेश ने शेयर मार्केट की रफ्तार को नई दिशा दी है. यदि यही ट्रेंड जारी रहा, तो आने वाले समय में भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि वैश्विक निवेश का केंद्र भी बन सकता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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