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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: महिला अफसरों को स्थायी कमीशन बरकरार, पेंशन की भी हकदार; वायुसेना की प्रदर्शन नीति को बताया गलत

सुप्रीम कोर्ट ने वायुसेना की 84 महिला अधिकारियों के हक में फैसला सुनाते हुए उन्हें स्थायी कमीशन और पेंशन देने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि कठिन क्षेत्रों में सेवा देने वाली महिलाओं को सेवा से हटाना गलत था.

Supreme Court
Edited by Vaibhav Gupta

सेना में स्थायी कमीशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला दिया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह फैसला सुनाया है.

स्थायी कमीशन को रहेगा बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत मिले अधिकार का इस्तेमाल करते हुए, महिलाओं अधिकारियों को मिला स्थायी कमीशन को बरकरार रखने को कहा है. कोर्ट ने कहा उसमें कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वे महिला अधिकारी SSCOs और हस्तक्षेपकर्ता, जिन्हें कार्यवाही के दौरान किसी भी स्तर पर सेवा से हटा दिया गया था, उन्हें यह माना जाएगा कि उन्होंने 20 साल की अपनी सेवा पूरी कर ली है और वे पेंशन के हकदार होंगी.

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उन्हें वेतन का बकाया नही मिलेगा. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भारतीय वायु सेना के शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने से इनकार करना गलत था. कोर्ट ने पाया कि 2019 की नीति के तहत प्रदर्शन मानदंड उचित अवसर के बिना लागू किए गए थे. अदालत ने प्रभावित अधिकारियों को एकमुश्त उपाय के रूप में पेंशन और पेंशन और परिणामी लाभ देने का निर्देश दिया है. सेना के 84 अधिकारियों की ओर से दायर याचिका पर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है.

कठिन और संवेदनशील इलाकों में तैनाती

13 महिला अधिकारियों ने स्थायी कमीशन नहीं दिए जाने के खिलाफ याचिका दायर की थी. जिनमें लेफ्टिनेंट कर्नल वनिता पाधी, लेफ्टिनेंट कर्नल गीता शर्मा और अन्य अधिकारी शामिल है. जिन्होंने कठिन और संवेदनशील इलाकों में तैनाती के बावजूद स्थायी कमीशन नहीं मिला. लेफ्टिनेंट कर्नल गीता शर्मा ने ‘ऑपरेशन गलवां’ में लद्दाख में कम्युनिकेशन की कमान संभाली, जबकि लेफ्टिनेंट कर्नल स्वाति रावत ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और आतंक प्रभावित क्षेत्रों में तैनात रहीं.

याचिकाकर्ताओं के वकील गुरुस्वामी ने कोर्ट को बताया था कि एक महिला अफसर, जिन्होंने बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद विमान वापस लाए, उन्हें सिर्फ एक हफ्ते बाद ही सेवा छोड़ने को कहा गया. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने की अपनी नीति का बचाव किया है.

पुरुषों को अहमियत देने का आरोप

केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि इस पहलू पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का बिना किसी भेदभाव के पालन किया जा रहा है. सरकार ने कोर्ट को बताया कि 2019 से अब तक 243 पुरूष और 177 महिलाओं को भर्ती किया गया है. वायु सेना के शॉट सर्विस कमीशन में पुरुषों को अहमियत देने का आरोप लगाया था.

कई महिला अधिकारियों के इस मामले में कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की थी. केंद्र सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया था कि केंद्र ने 2022 में मंजूरी दी थी, जिसके बाद भारतीय वायुसेना ने एनडीए के जरिए से महिला अधिकारियों की भर्ती शुरू की और ट्रेनिंग पूरी करने के बाद अधिकारियों को सीधे  कमीशन दिया जाएगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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