पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के चुनाव का शोर अपने चरम पर है, लेकिन इसी गहमागहमी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक अलग रूप देखने को मिला. रविवार को उत्तर कोलकाता की संकरी गलियों में स्थित ऐतिहासिक और सिद्ध ‘ठनठनिया कालीबाड़ी’ मंदिर में जब प्रधानमंत्री पहुंचे, तो माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया. ढोल-नगाड़ों और शंख की ध्वनि के बीच पीएम मोदी ने मां काली के चरणों में शीश नवाया और देश की खुशहाली के लिए आशीर्वाद मांगा.
300 साल पुराना इतिहास और पीएम की अटूट श्रद्धा
ठनठनिया कालीबाड़ी कोलकाता के सबसे प्राचीन और जागृत मंदिरों में से एक है. 1703 में स्थापित यह मंदिर तांत्रिक साधना का एक प्रमुख केंद्र रहा है. प्रधानमंत्री जब यहां पहुंचे, तो वे पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए.
কলকাতায় ঠনঠনিয়া কালীবাড়ির কিছু মুহূর্ত। pic.twitter.com/LiVTUsccFH
— Narendra Modi (@narendramodi) April 26, 2026
पीएम मोदी ने मंदिर के मुख्य गर्भगृह में मां काली की आरती उतारी और काफी देर तक हाथ जोड़कर ध्यान लगाया. इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में स्थित शिवलिंग पर भी जल अर्पित किया और पुजारियों से तिलक लगवाकर आशीर्वाद लिया.
रामकृष्ण परमहंस से जुड़ाव और अनोखी परंपराएं
ये मंदिर सिर्फ अपनी प्राचीनता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनोखी परंपराओं के लिए भी जाना जाता है. मान्यता है कि रामकृष्ण परमहंस भी यहां अक्सर आया करते थे. ठनठनिया कालीबाड़ी की एक और दिलचस्प बात ये है कि यहां मां को चढ़ावे में नॉन-वेज प्रसाद भी अर्पित किया जाता है, जो बंगाल की शाक्त परंपरा का एक अहम हिस्सा है. पीएम मोदी ने इस दौरान मंदिर की आध्यात्मिक विरासत के बारे में पुजारियों से चर्चा भी की.
भक्ति के बाद शक्ति प्रदर्शन
पूजा अर्चना के बाद पीएम मोदी ने ‘शक्ति प्रदर्शन’ की कमान संभाली और उत्तर कोलकाता की सड़कों पर एक विशाल रोड शो किया. मंदिर से निकलते ही सड़क के दोनों ओर खड़े हजारों लोगों ने ‘जय श्री राम’ और ‘जय मां काली’ के नारों से उनका स्वागत किया. चुनाव के इस दौर में पीएम का मंदिर जाना और फिर जनता के बीच पहुंचना, बंगाल की संस्कृति और राजनीति के गहरे जुड़ाव को दर्शाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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