विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार
भारत एक्सप्रेस
लोकतंत्र की जीत या ‘स्मैश एंड ग्रैब’? सिक्किम विलय की इनसाइड स्टोरी और अनसुने विवाद
सिक्किम, जो 1642 में नामग्याल वंश द्वारा स्थापित एक हिमालयी राजशाही था, 20वीं सदी में धीरे-धीरे भारत के साथ अपने राजनीतिक संबंधों की दिशा में बढ़ा.
वियतनाम युद्ध के 51 साल; अमेरिकी सैनिकों की कुर्बानी और वो सबक, जिसने दुनिया का नजरिया बदल दिया
30 अप्रैल 1975 को साइगॉन पर उत्तर वियतनामी सेना के कब्जे के साथ वियतनाम युद्ध समाप्त हो गया. यह लगभग 20 वर्षों तक चला संघर्ष था, जो मूल रूप से वियतनाम की स्वतंत्रता से जुड़ा था लेकिन शीत युद्ध के दौरान अमेरिका और कम्युनिस्ट शक्तियों के बीच अप्रत्यक्ष युद्ध बन गया.
PM की रेस में ‘शून्य’ पर थे नेहरू, फिर कैसे पलटी बाजी? जानें 1946 के कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव का वो फैसला
1946 का वर्ष भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अंतिम चरण का था, जब सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही थी. कांग्रेस पार्टी को अपना नया अध्यक्ष चुनना था, और यह पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा था.
जय सोमनाथ पुस्तक आत्मसम्मान और विजय के अटूट भाव की गाथा है- सुरेन्द्र अरोड़ा
अखिल भारतीय साहित्य परिषद् द्वारा प्रवासी भवन, नई दिल्ली में कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी कृत ‘जय सोमनाथ’ पर गोष्ठी आयोजित की गई.
बावनी इमली: सिर्फ पेड़ नहीं, बल्कि आजादी का गवाह; जानें 52 गुमनाम नायकों के बलिदान की ये कहानी
28 अप्रैल 1858 को फतेहपुर के 'बावनी इमली' पेड़ पर ठाकुर जोधा सिंह अटैया समेत 52 क्रांतिकारियों को अंग्रेजों ने फांसी दी थी. इस ऐतिहासिक और उपेक्षित शौर्य गाथा को लेखक भगवंत अनमोल ने अपने उपन्यास 'बावनी इमली' में जीवंत किया है.
कोलकाता से हावड़ा तक ‘हिंदी भाषी’ चेहरों पर भरोसा; बंगाल चुनाव में भाजपा ने उतारे पहली पीढ़ी के लड़ाके
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में भाजपा ने टीएमसी के 'बाहरी' नैरेटिव को चुनौती देने के लिए कोलकाता और हावड़ा की महत्वपूर्ण सीटों पर अपने पुराने और समर्पित हिंदी भाषी चेहरों को उतारा है. संतोष पाठक, रितेश तिवारी और उमेश राय जैसे उम्मीदवारों के जरिए भाजपा ने उन मतदाताओं को साधने की कोशिश की है.
तार आया है! 172 साल पहले आज ही शुरू हुई थी वह सेवा, जिसने भारत में संचार की दुनिया बदल दी
27 अप्रैल 1854 को भारत में आधुनिक संचार युग की औपचारिक शुरुआत हुई, जब बंबई से पुणे के बीच पहला आधिकारिक ‘तार’ भेजा गया. यह केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं थी, बल्कि औपनिवेशिक शासन को मजबूत करने वाला एक निर्णायक उपकरण बन गया.
गांधी की बात ठुकराई, जिन्ना का सपना तोड़ा; कौन थे गोपाल पाठा जिन्होंने बंगाल का भूगोल बदल दिया?
1946 में भारत विभाजन से पहले कलकत्ता में सांप्रदायिक तनाव चरम पर था. 16 अगस्त को मुस्लिम लीग द्वारा “डायरेक्ट एक्शन डे” के आह्वान के बाद शहर में भीषण हिंसा फैल गई, जिसे “ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स” के नाम से जाना जाता है.
सिनेमा का ‘माणिक’ और फ्रांस का गौरव: 1989 का वो दिन जब पूरी दुनिया ने माना सत्यजीत रे का लोहा
साल 1989 में भारतीय सिनेमा को वैश्विक गौरव मिला जब फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा मित्तेरां ने खुद कोलकाता आकर सत्यजीत रे को फ्रांस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'लेजियोन ऑफ ऑनर' से सम्मानित किया. सादगी और मानवीय संवेदनाओं के चितेरे रे ने 'अपू त्रयी' जैसी फिल्मों से विश्व सिनेमा की दिशा बदल दी थी.
“चेरनोबिल 1986: जब एक धमाके ने पूरे शहर को बना दिया ‘भूतिया ज़ोन’- दुनिया की सबसे खतरनाक परमाणु त्रासदी, जिसका खौफ आज भी जिंदा है”
Nuclear Accident History: 26 अप्रैल 1986 की रात हुआ चेरनोबिल न्यूक्लियर हादसा मानव इतिहास की सबसे खतरनाक परमाणु दुर्घटनाओं में से एक है, जिसने पूरी दुनिया को परमाणु ऊर्जा के खतरों से आगाह किया.







