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वित्त वर्ष 2026 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.5-6.9% के बीच रहने की संभावना: FICCI

FICCI) ने गुरुवार (16 जनवरी) को अनुमान लगाया कि भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 26 में 6.5-6.9 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज करेगी, जो इनफ्लेशन के दबाव में कमी, पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) पर निरंतर जोर और उपभोक्ता खर्च में तेजी के कारण होगी.

GDP

(सांकेतिक तस्वीर).

उद्योग निकाय फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) ने गुरुवार (16 जनवरी) को अनुमान लगाया कि भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 26 में 6.5-6.9 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज करेगी, जो इनफ्लेशन के दबाव में कमी, पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) पर निरंतर जोर और उपभोक्ता खर्च में तेजी के कारण होगी.

FICCI ने अपने ताजा आर्थिक आउटलुक में बताया, “इन फैक्टर्स पर विचार करते हुए भाग लेने वाले अर्थशास्त्रियों ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की GDP की वृद्धि का अनुमान 6.5 प्रतिशत और 6.9 प्रतिशत के बीच लगाया है, जो अवसरों और चुनौतियों दोनों को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है.”

उद्योग निकाय ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कृषि क्षेत्र के लिए बेहतर दृष्टिकोण से ग्रामीण खपत को बढ़ावा मिलेगा, जबकि इनफ्लेशन में कमी से शहरी खपत बढ़ेगी.

पूंजीगत खर्च विकास का मुख्य चालक रहेगा

निवेश के मोर्चे पर सरकार का पूंजीगत खर्च पर ध्यान 2025-26 में विकास का मुख्य चालक बना रहेगा. इसके अतिरिक्त सेवा क्षेत्र, विशेष रूप से आतिथ्य, रियल एस्टेट, स्वास्थ्य और शिक्षा, से नई क्षमता के निर्माण में योगदान की उम्मीद है.

आउटलुक में कहा गया है, “भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, असमान घरेलू मांग और चीन से अधिक आपूर्ति जैसे कारकों ने निवेशकों को चिंतित कर रखा है. हालांकि, कॉरपोरेट बैलेंस शीट में सुधार, क्षमता उपयोग दरों में स्थिरता और मांग में तेजी के साथ निजी निवेश में तेजी आ सकती है.”

लेबर कॉस्ट और इनफ्लेशन बढ़ सकते हैं

आउटलुक ने कहा, ” टैक्स कटौती (व्यक्तिगत और व्यावसायिक) की संभावना अमेरिकी राजकोषीय घाटे को बढ़ा सकती है, जबकि उच्च टैरिफ और सख्त इमिग्रेशन क्रिटेरिया लेबर कॉस्ट और इनफ्लेशन को बढ़ा सकते हैं. फेडरल रिजर्व नीतिगत दरों में अपेक्षा से कम कटौती कर सकता है. इससे भारत सहित उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह कम हो सकता है, जिससे रुपये में उतार-चढ़ाव हो सकता है.”

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि संभावित यूएस-चीन व्यापार संघर्ष सहित बिजनेस टेंशन, कम समय के लिए आपूर्ति चेन को बाधित कर सकते हैं और इनपुट लागत बढ़ा सकते हैं. हालांकि, अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि अमेरिका भारत के प्रति एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाएगा. फिर भी भारत चीन से दूर वैश्विक सप्लाई चेन विविधीकरण से फायदा उठाने के लिए तैयार है.


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-भारत एक्स्प्रेस



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