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दुनिया के सबसे खूंखार आतंकवादी संगठन ISIS की ब्रांच से जुड़े कश्मीरी दंपति समेत 5 गुनहगारों को सुनाई गई सजा, 20 साल तक जेल में रहना होगा

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अदालत ने भारत में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन आईएसआईएस का हिस्सा इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (आईएसकेपी) से जुड़े होने के लिए एक कश्मीरी दंपति सहित पांच व्यक्तियों को अलग-अलग जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपियों को सात वर्ष से 20 वर्ष की सजा सुनाई है।

पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंदर जीत सिंह ने मुख्य आरोपी पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर जहानजैब सामी को यूएपीए की धारा 17 और 18 के तहत अपराध के लिए 20 साल कैद की सजा सुनाई। उन्हें धारा 124ए और 120बी और यूएपीए की धारा 13, 38 और 39 के तहत अलग-अलग शर्तों की सजा भी सुनाई गई है। सामी ने अपराध स्वीकार कर लिया था।

मुसलमानों का ब्रेन-वॉश किया जा रहा था

अदालत ने पाया कि जहानजैब सामी ने स्वात अल हिंद, वॉयस ऑफ हिंद पत्रिका तैयार की थी और वह भोले-भाले युवा मुसलमानों का ब्रेन-वॉश करके उन्हें कट्टरपंथ के लिए भर्ती करने में गहराई से शामिल था।

अदालत ने कहा कि दोषी जहानजैब सामी हथियार, आईईडी के रिमोट और आत्मघाती जैकेट खरीदने में भी शामिल था। दोषी बिटकॉइन के माध्यम से धन जुटाने में भी शामिल था, जो ऑनलाइन धन जुटाने का एक परोक्ष तरीका है। उनकी पत्नी हिना बशीर बेग को यूएपीए की धारा 38(2) और 39(2) के तहत अपराध के लिए 8 साल की कैद की सजा सुनाई गई थी।

ISIS के लिए पति की मदद कर रही थी हिना

अदालत ने पाया कि बेग जो आईएसआईएस की विचारधारा का पालन कर रही थी, कंप्यूटर और प्रबंधन में अपने कौशल का उपयोग करके सोशल मीडिया का उपयोग कर रही थी और अपने पति के साथ पूरी तरह से सक्रिय थी। अदालत ने एक अन्य दोषी अब्दुल्ला बासित को यूएपीए की धारा 38 और 39 के तहत अपराधों के लिए पहले ही पूरी की जा चुकी अवधि की सजा सुनाई गई और आदेश दिया गया कि यदि किसी अन्य मामले में आवश्यकता नहीं हुई तो उसे हिरासत से रिहा कर दिया जाए। बासित ने भी अपना गुनाह कबूल कर लिया था।

दोषी सादिया अनवर शेख सादिया, जो गिरफ्तारी के समय पत्रकारिता की छात्रा थी, को यह कहते हुए 7 साल की सजा सुनाई गई कि वह आईएसआईएस की विचारधारा से अत्यधिक प्रभावित थी। अदालत ने नबील सिद्दीक खत्री को यह कहते हुए 15 साल जेल की सजा सुनाई गई थी कि उन्होंने भारत में आईएसआईएस की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए धन जुटाया था। उन्होंने अपराध स्वीकार भी कर लिया।

अदालत ने कहा कि किसी भी संगठन के जीवित रहने, जारी रहने और अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कार्य करने के लिए, धन की उपलब्धता और संचलन सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है। धन के अभाव में, सर्वाधिक समर्पित कैडर के बावजूद, कोई संगठन आगे नहीं बढ़ पाता। इसलिए, यह कहना कि फंड किसी संगठन की जीवन-रेखा है, अतिशयोक्ति नहीं होगी।

एनआईए ने आरोप लगाया कि सामी आईएसआईएस की विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से धन जुटा रहा था, प्राप्त कर रहा था और प्रदान कर रहा था।

एनआईए ने आगे कहा कि आरोपी व्यक्तियों ने देशद्रोही नारे लगाकर और सार्वजनिक स्थानों पर भित्तिचित्र बनाकर और सामाजिक और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया पर इसे उजागर करके मुसलमानों को उकसाया।

एनआईए के अनुसार, आरोपी कुछ भोले-भाले युवाओं को सीएए विरोधी प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए भी उकसा रहे थे। यह भी आरोप लगाया गया कि यदि विरोध प्रदर्शन मुसलमानों को भड़काने में विफल रहा, तो आरोपी व्यक्ति सरकारी इमारतों और सार्वजनिक संपत्ति में आगजनी की योजना बना रहे थे ताकि दंगे हो सकें और वे मुसलमानों की भावनाओं का फायदा उठा सकें।

— भारत एक्सप्रेस

Bharat Express Desk

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