Bharat Express DD Free Dish

जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड के बाद न्यायपालिका पर एक और बड़ा आरोप

जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड के बाद न्यायपालिका पर एक और बड़ा आरोप लगा है. सूत्रों के मुताबिक एनसीएलएटी के सदस्य जस्टिस शरद कुमार शर्मा ने चौकाने वाला दावा किया है.

Justice Yashwant Verma
Edited by Vaibhav Gupta

जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड के बाद न्यायपालिका पर एक और बड़ा आरोप लगा है. सूत्रों के मुताबिक एनसीएलएटी के सदस्य जस्टिस शरद कुमार शर्मा ने चौकाने वाला दावा किया है.

उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के एक जज ने उससे संपर्क किया था. एक विशेष वादी के पक्ष में फैसला सुनाने के लिए उनसे संपर्क किया था.

सुप्रीम कोर्ट ने दावों की जांच का दिया आदेश

सूत्रों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने दावों की जांच के आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल मामले की जांच करते है. जांच में यह पता लगाया जाएगा कि शरद कुमार शर्मा को कौन से सम्मानित जज ने फोन किया था. जस्टिस शरद कुमार शर्मा ने यह भी दावा किया है कि उनसे संपर्क करने के बाद उन्होंने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है.

यह मामला एक अपील से जुड़ा है जो 2023 में दायर की गई थी और कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया यानी सीआईआरपी को मंजूरी करने के आदेश को चुनौती दी गई थी. यह अपील एनसीएलएटी को मंजूर करने के आदेश को चुनौती दी गई थी. यह अपील एनसीएलएटी की चेन्नई बेंच में जस्टिस शरद कुमार शर्मा और तकनीकी सदस्य जतिंद्रनाथ स्वैन को दो सदस्यीय पीठ के सामने आई थी.

जस्टिस शर्मा ने जेप्पियार सीमेंट्स मामले में खुद को किया अलग

बता दें कि जस्टिस शर्मा ने इससे पहले नवंबर 2024 में भी जेप्पियार सीमेंट्स से संबंधित मामले में खुद को अलग कर लिया था, जब उनके भाई ने उनसे मामले में सलाह मांगी थी. इतना ही नही जस्टिस शर्मा अपने भाई के व्हाट्सएप मैसेज को आदेश में शब्दशः शामिल किया था. उनके भाई ने व्हाट्सएप मैसेज में लिखा था कि भाई मैं जो कागज भेज रहा हूं, उसमें क्या हो सकता है, इसके होने की संभावना क्या है, कृपया उचित सलाह देने की कोशिश करें. यह आपके ही कोर्ट का मामला है.

जस्टिस शर्मा ने जुलाई 2024 में बायजू के संस्थापक बायजू रवीन्द्रन की याचिका की सुनवाई से भी खुद अलग कर लिया था, क्योंकि उन्होंने पहले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई के लिए वकील के रूप में काम किया था, जो इस मामले में मुख्य लाभार्थी था. जस्टिस शर्मा का यह कदम न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दिखाता है. उन्होंने कोर्ट में अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि व्स तरह के दबाव न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर करते हैं.

ये भी पढ़े: Vice President Race: गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी की निंदा वाले बयान पर देश के 56 रिटायर्ड जजों ने जताई असहमति

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read