सांकेतिक तस्वीर.
दहेज के लिए पत्नी की हत्या करने के मामले में आरोपी ब्लैक कैट कमांडों को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया है. आरोपी कमांडो ने सरेंडर करने के लिए छूट की मांग की थी. जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस विनोद चन्द्रन की बेंच ने यह आदेश दिया है. हालांकि कोर्ट ने सरेंडर करने के लिए दो सप्ताह का समय दे दिया है और संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब देने को कहा है.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि वह ऑपरेशन सिंदूर में हिस्सा ले चुका है और वह 20 साल से राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात है. जिसपर जस्टिस भुइयां ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आपने जिस तरह से पत्नी का गला घोंटा, उसको देख कर यह छूट देने वाला यह केस नही है. छूट देने वाला वह केस होता है, जिसमें, 3 महीने, 6 महीने या फिर 1 साल तक कि सजा का प्रावधान है.
कोर्ट ने यह भी कहा कि आप ऑपरेशन सिंदूर के हिस्सा थे, इससे आपको घर पर अत्याचार करने की आजादी नही मिल जाती है. आप देखिए कि फिजीकली कितने फिट है, ये दिखा रहा है कि आपने अपनी पत्नी का गला घोंट कर मार दिया गया हो.
दहेज में बाइक की मांग, न मिलने पर हत्या का आरोप
कोर्ट ने कहा कि यह मामला किसी भी तरह की छूट या विशेष राहत देने वाला नही है. हाई कोर्ट ने पहले ही राहत देने से इनकार कर दिया था. याचिकाकर्ता के वकील ने इस मामले में पेश गवाहों का बयान विरोधाभासी होने की दलील दी, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया था.
आरोपी बलजिंदर सिंह के खिलाफ धारा 304बी के तहत मामला दर्ज है. उसपर आरोप है कि उसने दहेज में मोटरसाइकिल की मांग की थी, नही मिलने पर पत्नी की हत्या कर दी. यह आरोप मृतका के भाई और उसकी भाभी ने लगाया था. यह घटना 2002 की है.
जुलाई 2004 ने अमृतसर की निचली अदालत ने बलजिंदर को दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई. उसके बाद 20 साल तक यह मामला हाई कोर्ट में चलता रहा, इसी बीच तीन साल बाद बलजिंदर जमानत पर बाहर आ गया.
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-भारत एक्सप्रेस
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