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महाकुंभ 2025

महाकुम्भ 2025 में केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल, भाजपा सांसद रेखा शर्मा, भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट सुबुही खान ने भी स्नान किया और योगी सरकार की व्यवस्थाओं की तारीफ की.

काशी तमिल संगमम का तीसरा संस्करण 16 फरवरी से 24 फरवरी तक प्रयागराज में आयोजित होगा, जिसमें उत्तर और दक्षिण भारत की संस्कृतियों का साक्षी बनेगा. यह आयोजन "एक भारत, श्रेष्ठ भारत" के उद्देश्य को आगे बढ़ाने में उपयोगी साबित होगा.

महाकुम्भ 2025 में अब तक 50 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में आस्था की पावन डुबकी लगाई है, जो किसी भी धार्मिक आयोजन में मानव इतिहास की सबसे बड़ी सहभागिता है.

अदाणी समूह द्वारा महाकुंभ क्षेत्र में सेवा कार्यों का अनंत श्री विभूषित श्रोत्रीय महामंडलेश्वर 1008 श्री स्वामी सद्गुरु स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती जी महराज श्री पंच दश नाम जूना अखाड़ा श्री राम क्षेत्र महा संस्थानम दक्षिण कन्नड़, कर्नाटक ने प्रशंसा किया एवं साधुवाद दिया है.

'महाकुम्भ 2025' की जहां एक तरफ पूरे विश्व में प्रशंसा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे तत्व भी कम नहीं है, जो सोशल मीडिया के जरिए फर्जी वीडियो और भ्रामक खबरें पोस्ट कर सनातन धर्म के इस सबसे बड़े धार्मिक, सांस्कृतिक समागम को बदनाम करने में लगे हुए हैं.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राज्यपाल रमेन डेका ने महाकुंभ 2025 के दौरान त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान किया और प्रदेशवासियों के कल्याण के लिए आशीर्वाद लिया. सभी छत्तीसगढ़ी अतिथियों ने इस धार्मिक आयोजन को सौभाग्य बताया और यूपी सरकार का आभार व्यक्त किया.

महाकुम्भ 2025 में विदेशी सैलानियों की रुचि में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां वे सिर्फ नागा साधुओं का जीवन ही नहीं, बल्कि महाकुम्भ की व्यवस्थाओं और सनातन धर्म का अध्ययन कर रहे हैं. अफ्रीका के घाना से आए प्रतिनिधियों ने भारतीय संस्कृति की सराहना की.

महाकुम्भ 2025 में माघ पूर्णिमा के स्नान पर्व पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच शहर की ट्रैफिक व्यवस्था अब पूरी तरह से सुचारू रूप से संचालित हो रही है

माघ पूर्णिमा स्नान के बाद प्रशासन ने रातभर सफाई अभियान चलाकर संगम घाटों को स्वच्छ और सुंदर बनाया, जिससे श्रद्धालुओं को पवित्र स्नान का अनुभव मिला.

योगी सरकार ने महाकुम्भ-2025 को अद्वितीय, अविस्मरणीय व अभूतपूर्व बना दिया है. इसके उपरांत फाल्गुन मास में भी त्रिवेणी तट पर संस्कृति, पर्यावरण व बर्ड फेस्टिवल का 'संगम' होगा.