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Indian Navy

भारतीय नौसेना के लिए एम/एस एलएंडटी शिपयार्ड द्वारा निर्मित दो मल्टी पर्पस जहाजों में से दूसरे जहाज ‘उत्कर्ष’ का शुभारंभ चेन्नई के एलएंडटी, कट्टुपल्ली में हुआ.

अमूल्य भारतीय तटरक्षक बल के लिए एक महत्वपूर्ण जोड़ होगा. यह जहाज समुद्री सीमाओं पर निगरानी रखने, अवैध गतिविधियों को रोकने, पर्यावरण संरक्षण, और मानवीय सहायता प्रदान करने जैसे कार्यों में सहायक होगा. 

'शार्ल डि गॉल' फ्रांसीसी नौसेना का प्रमुख विमानवाहक पोत है, जो परमाणु ऊर्जा से संचालित होता है. इसे आधुनिक तकनीक और उन्नत हथियार प्रणालियों से लैस किया गया है.

भारतीय नौसेना द्वारा फ्रांस से राफेल-एम लड़ाकू विमानों के 26 जेट खरीदने की योजना पर एक वरिष्ठ फ्रांसीसी नौसेना अधिकारी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के तहत, 20 दिसंबर 2024 को भारतीय नौसेना को दो अत्याधुनिक युद्धपोत, *सूरत' (विध्वंसक) और नीलगिरी' (फ्रिगेट) सुपुर्द किए गए.

ये दोनों युद्धपोत पूरी तरह स्वदेशी निर्माण के उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जिनमें अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. यह भारतीय नौसेना की ताकत में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल की दिशा में एक बड़ा कदम है.

ISRO ने बताया, प्रकिया में एक वेल डेक शिप अपने डेक में पानी भरता है, जिससे नावों, लैंडिंग क्राफ्ट और अंतरिक्ष यान की सुरक्षित डॉकिंग और रिकवरी संभव हो पाती है. गगनयान मिशन के लिए यह तकनीक अंतरिक्ष यात्रियों की उनके अंतरिक्ष मिशन के बाद तेज और आरामदायक रिकवरी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है.

भारत ने अक्टूबर 2018 में रूस के साथ चार क्रिवाक-III श्रेणी के उन्नत फ्रिगेट के लिए समझौता किया था. इनमें से पहले दो जहाज रूस से लगभग ₹8,000 करोड़ में आयात किए जाएंगे. शेष दो जहाज गोवा शिपयार्ड में ₹13,000 करोड़ की लागत से बनाए जा रहे हैं.

दृष्टि-10 स्टारलाइनर ड्रोन भारतीय रक्षा क्षेत्र की आत्मनिर्भरता, इनोवेशन, और भारत के समुद्री सुरक्षा हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. अडानी डिफेंस और भारतीय नौसेना के बीच सहयोग देश की रक्षा क्षमताओं को और मजबूत कर रहा है.

Video: भारत की दूसरी परमाणु शक्ति से संपन्न बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS अरिघात भारतीय नौसेना में के बेड़े में शामिल हो गई है. INS अरिहंत का उन्नत संस्करण यह पनडुब्बी भारत की नौसैनिक क्षमताओं और सामरिक परमाणु प्रतिरोध में एक बड़ा कदम है.