दोस्त की मौत ने बदली जिंदगी; फ्लैट बेचकर ‘हेलमेट मैन’ बन गया बिहार का यह शख्स, ऐसे बचाई हजारों जानें
बिहार के राघवेंद्र कुमार ने अपने दोस्त की सड़क हादसे में हुई मौत के बाद हेलमेट जागरूकता को अपनी जिंदगी का मिशन बना लिया.
मथुरा से कुरुक्षेत्र तक… जानिए कान्हा के जीवन से जुड़े उन पवित्र स्थानों का क्या है रहस्य?
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सिर्फ भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि उनके जीवन, लीलाओं और दिए गए संदेशों को याद करने का अवसर है.
सता के संक्रमण का वो पहला पड़ाव, जानिए कब भारतीयों के हाथ आई देश की कमान
2 सितंबर 1946 भारत की आज़ादी की राह का एक बेहद अहम दिन था. इसी दिन अंतरिम सरकार ने कामकाज संभाला, जिसमें जवाहरलाल नेहरू समेत कई प्रमुख भारतीय नेताओं ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मकसद नहीं… जानिए आज भी क्यों प्रासंगिक हैं दुष्यंत कुमार की ये अमर पंक्तियां?
दुष्यंत कुमार सिर्फ कवि नहीं, बल्कि आम आदमी की बेचैनी, संघर्ष और बदलाव की उम्मीद की आवाज थे. ‘साये में धूप’ जैसी कृति और उनकी अमर पंक्तियां आज भी व्यवस्था पर सवाल उठाने और बदलाव की उम्मीद जगाने का काम करती हैं.
विदेशी माटी से उपजा हिंदी का सच्चा साधक, जानिए फादर कामिल बुल्के की अनकही कहानी
हिंदी को भारत में शोधपरक विस्तार देने में अहम भूमिका निभाने वाला एक प्रमुख नाम विदेशी मूल का ही है. फादर कामिल बुल्के का जीवन भारतीय भाषा, विशेषकर हिंदी के प्रति गहरे प्रेम और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है.
जिंदगी बदलने के लिए 100 दिन काफी हैं? डॉ. अमित कुमार की इस किताब में छिपा है सफलता का फॉर्मूला
क्या 100 दिनों में सपनों को हकीकत के करीब लाया जा सकता है? डॉ. अमित कुमार की किताब ‘सपनों से उपलब्धि तक: 100 दिन के सूत्र’ इसी सवाल का व्यावहारिक जवाब तलाशती है.
Beant Singh Murder Mystery: 31 अगस्त 1995 की वह शाम जब चंडीगढ़ सचिवालय में गूंजा था दहला देने वाला धमाका
31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ के सिविल सचिवालय परिसर में हुए आत्मघाती बम धमाके में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह समेत 17 लोगों की मौत हो गई थी. जानिए कैसे रची गई थी इस हमले की साजिश.
562 रियासतों से लेकर आज के नक्शे तक… जानिए कैसे तय हुई देश के राज्यों की दिलचस्प और संघर्ष भरी कहानी
आजादी के बाद भारत का नक्शा कभी एक जैसा नहीं रहा. रियासतों के विलय से शुरू हुई यह यात्रा भाषाई आंदोलनों, क्षेत्रीय आकांक्षाओं और राजनीतिक फैसलों के साथ लगातार बदलती गई. 31 अगस्त 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम पारित हुआ.
रेत और विमुक्ति दिवस: वे जनजातियां जिन्हें 31 अगस्त को मिला दूसरा स्वतंत्रता दिवस
31 अगस्त को विमुक्ति दिवस उन घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों की मुक्ति की याद में मनाया जाता है, जिन्हें ब्रिटिश शासन ने ‘जन्मजात अपराधी’ घोषित किया था.
सत्ता पाते ही परिवार के लिए जारी कर दिया था फरमान; कौन थे कर्नाटक के पहले गैर-कांग्रेसी CM रामकृष्ण हेगड़े?
कर्नाटक के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री और मूल्य-आधारित राजनीति के प्रतीक रामकृष्ण हेगड़े की 100वीं जयंती पर जानिए कैसे उन्होंने परिवार को सत्ता से दूर रखकर त्रिस्तरीय पंचायत राज और लोकायुक्त की नींव रखी थी.







