भारतीय न्यायपालिका में राजस्थान हाई कोर्ट के कामकाज को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता और राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting CJ) जस्टिस एस. पी. शर्मा के बीच जारी खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है.
जस्टिस संदीप मेहता ने देश के CJI सूर्यकांत को 30 और 31 अगस्त को दो नए पत्र भेजे हैं. इसके साथ ही जस्टिस मेहता द्वारा सीजेआई को लिखे गए पत्रों की संख्या बढ़कर 5 हो गई है.
‘केसों की ट्रांसफर और लिस्टिंग में हेरफेर’
जस्टिस संदीप मेहता ने 31 अगस्त को लिखे अपने पांचवें पत्र में राजस्थान हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण मुकदमों की लिस्टिंग और सुनवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि एक्टिंग सीजे जस्टिस एस. पी. शर्मा द्वारा मामलों को एक पीठ (Bench) से दूसरी पीठ में स्थानांतरित करने और लिस्टिंग में हेरफेर किया जा रहा है.
अपने दावों को मजबूत करने के लिए जस्टिस मेहता ने राजस्थान के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के ‘जल जीवन मिशन’ से जुड़े ₹211 करोड़ के टेंडर विवाद का हवाला दिया है.
हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने 17 जुलाई 2026 के अपने फैसले में राज्य सरकार की कार्रवाई को रद्द करते हुए कहा था कि संबंधित फर्म को टेंडर देने से सरकारी खजाने को करीब ₹211 करोड़ का नुकसान हो रहा है.
वहीं, जस्टिस मेहता का आरोप है कि इस विशेष अपील को जस्टिस शर्मा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया और 28 जुलाई 2026 को अंतरिम आदेश जारी कर सिंगल बेंच के फैसले पर रोक लगा दी.
सबूतों के साथ फिर दोहराई मांग
इससे पहले 30 अगस्त को लिखे चौथे पत्र में जस्टिस मेहता ने सीजेआई सूर्यकांत के समक्ष नए सबूत पेश करने का दावा किया था. उन्होंने 2 अगस्त, 10 अगस्त और 17 अगस्त को लिखे अपने पिछले पत्रों का हवाला देते हुए जस्टिस शर्मा के कामकाज को मनमाना, संदिग्ध और पक्षपातपूर्ण करार दिया और संस्थागत जांच की अपनी मांग को दोहराया.
‘सीजेआई के फैसले का इंतजार करें’
दूसरी तरफ, राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस. पी. शर्मा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह झूठा, बेबुनियाद और तथ्यों से परे बताया है.
उन्होंने भी सीजेआई सूर्यकांत को पत्र लिखकर दस्तावेजों और सबूतों के साथ अपना पक्ष प्रस्तुत किया है. जस्टिस शर्मा ने कहा, ‘मुझे भारतीय न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है. सभी संबंधित लोगों से अपील है कि वे कोई भी निष्कर्ष निकालने से पहले सीजेआई सूर्यकांत के फैसले का इंतजार करें. सही समय आने पर सीजेआई की अनुमति से मैं खुद मीडिया के सामने अपना पक्ष रखूंगा.’
‘स्थापित संस्थागत प्रक्रिया से होगी जांच’
इस पूरे विवाद पर देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत पहले ही स्थिति साफ कर चुके हैं. सीजेआई ने स्पष्ट किया है कि किसी भी सिटिंग जज के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर न्यायपालिका की स्थापित संस्थागत प्रक्रिया (Institutional Procedure) के तहत ही विचार किया जाएगा. प्रक्रिया के दौरान संबंधित जज को अपना पक्ष रखने का पूरा और निष्पक्ष मौका दिया जाएगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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