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बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के सांसद अनुराग ठाकुर को सुप्रीम कोर्ट ओर से एक बड़ी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि अनुराग ठाकुर पर लगाया गया प्रतिबंध आजीवन नहीं माना जा सकता और वह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की गतिविधियों में नियमों के तहत भाग लेने के लिए पूरे तरीके से स्वतंत्र हैं. कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक प्रतिबंध जारी रखना अनुपातहीन होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों द्वारा नियमित डीजीपी की नियुक्ति में की जा रही देरी पर सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने कहा कि कार्यवाहक और एडहॉक डीजीपी की परंपरा से योग्य व वरिष्ठ अधिकारियों को अवसर नहीं मिल पाता, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रभावित होती है.

चेक बाउंस मामले में फिल्म अभिनेता राजपाल यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर जेल में सरेंडर किया है.

कांग्रेस विधायक केवाई नानजे गौड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में मालूर सीट से उनकी जीत को बरकरार रखते हुए हाई कोर्ट के चुनाव रद्द करने वाले फैसले को पलट दिया है.

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को अवैध बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में सुपरटेक लिमिटेड की लंबित 16 परियोजनाओं को पूरा करने को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने एनसीएलएटी के आदेश को बरकरार रखते हुए इन परियोजनाओं का निर्माण और प्रबंधन सरकारी कंपनी एनबीसीसी को सौंपने की अनुमति दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को बड़ा झटका देते हुए 2008 से 2019 तक का बकाया महंगाई भत्ता (DA) सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को देने का आदेश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने एशियन होटल्स और पंजाब नेशनल बैंक व बैंक ऑफ महाराष्ट्र के बीच हुए 705 करोड़ के सेटलमेंट की CBI जांच वाली याचिका पर सुनवाई शुरू कर दी है. प्रशांत भूषण की दलीलों और CJI की टिप्पणियों ने दिल्ली के पॉश इलाके में स्थित 5-स्टार होटल की कम आंकी गई कीमत पर बड़े सवाल खड़े किए हैं.

अभिनेता विवेक ओबेरॉय की व्यक्तित्व सुरक्षा याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने राहत के संकेत दिए हैं. कोर्ट ने बिना अनुमति फोटो, AI और डीपफेक तकनीक के जरिए छवि खराब करने या विज्ञापन में इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात कही है.

वकील अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाते हुए इसे मार्च में सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया है. याचिका में तर्क दिया गया है कि 'मुफ्त की घोषणाएं' स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की जड़ों को हिलाती हैं और यह भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है. चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस जारी है.