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supreme court of india

82 वर्षीय बुजुर्ग के साथ हुए 22.92 करोड़ के 'डिजिटल अरेस्ट' फ्रॉड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, RBI और 7 प्राइवेट बैंकों को नोटिस भेजा है. कंबोडिया से संचालित इस गैंग ने बुजुर्ग को डराकर उनकी उम्र भर की कमाई लूट ली.

सुप्रीम कोर्ट ने BCCI की टीम को 'टीम इंडिया' कहने पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है. अदालत ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि "बेवजह अदालत का समय बर्बाद न करें."

लाल किला हमले के दोषी आरिफ उर्फ अशफाक की फांसी पर सस्पेंस बरकरार है. सुप्रीम कोर्ट ने आतंकी की क्यूरेटिव याचिका पर केंद्र सरकार और NIA को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. 24 साल पहले हुए इस हमले में तीन लोग शहीद हुए थे.

Alimony Case: सुप्रीम कोर्ट में तलाक के एक अनोखे मामले ने सभी को चौंका दिया, जहां महिला ने न तो एलिमनी की मांग की और न ही किसी अन्य आर्थिक सहायता की. जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन ने इसे ‘रेयर सेटलमेंट’ बताते हुए उसकी नेकदिली की सराहना की.

BR Gavai Successor Justice Suryakant: भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस बीआर गवई ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में जस्टिस सूर्यकांत का नाम कानून मंत्रालय को भेजा है. उन्होंने इस संबंध में औपचारिक चिट्ठी लिखी है.

उज्ज्वल मिश्रा के साथ पॉडकास्ट में एडवोकेट कनिका भारद्वाज ने कानून और न्याय की अंधेरी सच्चाइयों को उजागर किया। उन्होंने ये माना कि लड़कों के लिए आज के दौर में कानून कमजोर हैं जिन्हें मजबूत करने की जरूरत है। कनिका ने जोर दिया कि हाई-प्रोफाइल केसों में मीडिया और राजनीतिक दबाव भी निष्पक्षता को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश और ईमानदार वकीलों के प्रयास सिस्टम को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। देखिए पॉडकास्ट...

उज्ज्वल मिश्रा के पॉडकास्ट में एडवोकेट कनिका भारद्वाज के साथ चर्चा हुई कि क्या मीडिया ट्रायल कोर्ट के फैसलों को प्रभावित करते हैं? सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिक कर रहीं एडवोकेट कनिका ने बताया कि भारत में जजों को कानून और सबूतों के आधार पर फैसले लेने की सख्त ट्रेनिंग होती है, जिससे मीडिया का प्रभाव सीमित रहता है। हालांकि, हाई-प्रोफाइल केसों में मीडिया की आक्रामक कवरेज से जनता का दबाव बढ़ सकता है, जो अप्रत्यक्ष रूप से माहौल को प्रभावित करता है। फिर भी, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के दिशानिर्देश सुनिश्चित करते हैं कि न्यायिक प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष रहे। देखिए पॉडकास्ट...

उज्ज्वल मिश्रा के पॉडकास्ट में एडवोकेट कनिका भारद्वाज के साथ 'Jolly LLB' और 'OMG' जैसी फिल्मों में दिखाए गए कोर्टरूम ड्रामे की सच्चाई पर चर्चा हुई। फिल्मों में कोर्ट की कार्यवाही को नाटकीय बनाया जाता है, जैसे जोरदार भाषण और त्वरित फैसले, जो वास्तविकता से भिन्न हैं। असल कोर्ट में प्रक्रिया लंबी, तकनीकी और कम नाटकीय होती है। 'Jolly LLB' में भ्रष्टाचार और 'OMG' में सामाजिक मुद्दों को अतिशयोक्ति के साथ दिखाया गया, जो मनोरंजन के लिए है। हालांकि, ये फिल्में कानूनी प्रणाली की खामियों को उजागर करती हैं, लेकिन वास्तविकता अधिक जटिल और धीमी होती है। देखिए पॉडकास्ट

उज्ज्वल मिश्रा के पॉडकास्ट में एडवोकेट कनिका भारद्वाज के साथ वकीलों के प्रकारों पर चर्चा हुई। भारत में वकील मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, और जिला अदालतों में प्रैक्टिस करते हैं। सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट-ऑन-रेकॉर्ड (AOR) विशेष रूप से केस दाखिल करते हैं, जिन्हें न्यूनतम तीन वर्ष का अनुभव चाहिए। हाई कोर्ट में सिविल, क्रिमिनल, कॉन्स्टिट्यूशनल, मैट्रिमोनियल, और लेबर लॉ जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता वाले वकील होते हैं। जिला स्तर पर सत्र, सिविल, और आपराधिक वकील कार्य करते हैं। पैनल वकीलों का चयन अनुभव, अखंडता, और योग्यता के आधार पर होता है। देखिए वीडियो...

जस्टिस नरीमन ने पूजा स्थल अधिनियम 1991 को लेकर कहा कि इस कानून को सही तरीके से लागू नही होने की वजह से सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा है.