जस्टिस बीआर गवई.
CJI BR Gavai at SIFOCC: वाणिज्यिक न्यायालयों के स्थायी अंतरराष्ट्रीय मंच (SIFOCC) के छठे पूर्ण सत्र में भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर महत्वपूर्ण संबोधन दिया. इस आयोजन में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति मनमोहन और दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे.
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने कहा, “कानून को राज्य और नागरिक, निवेशक और नियामक, उद्यम और समाज के बीच भरोसे का वास्तुकार (आर्किटेक्चर ऑफ ट्रस्ट) बनाए रखना होगा.” उन्होंने जोर दिया कि भारत को आर्थिक विकास और न्याय के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है. आर्थिक प्रगति मानव कल्याण और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ी होनी चाहिए.
‘नीतिगत मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता SC’
उन्होंने रूल ऑफ लॉ को पारदर्शिता और निष्पक्षता की आधारशिला बताया और कहा कि न्यायपालिका संवैधानिक प्रहरी के रूप में शासन में जवाबदेही और नीतिगत स्थिरता सुनिश्चित करती है. उन्होंने स्पष्ट कहा, “सुप्रीम कोर्ट नीतिगत मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता, जब तक मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न हो.”
इस सत्र में वाणिज्यिक कानूनों की मजबूती, निवेशक विश्वास और वैश्विक न्यायिक सहयोग पर गहन चर्चा हुई. दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह ने भी इसमें सक्रिय भूमिका निभाई. मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने भारत की न्यायिक व्यवस्था को वैश्विक मंच पर मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई. यह आयोजन संविधान के मूल्यों को आर्थिक विकास के साथ जोड़ने का प्रतीक बना.
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