जमानत मिलने के बावजूद जमानत राशि नही भरने वाले कैदियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि किसी भी अपराध के लिए गिरफ्तार और मुकदमे की सुनवाई के दौरान जेल में बंद कोई भी गरीब व्यक्ति अगर जमानत के लिए पैसे देने में असमर्थ है तो सरकार उस व्यक्ति की रिहाई सुनिश्चित कराएगी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया है कि सरकार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से जमानत राशि उपलब्ध कराएगी. जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से सभी राज्यों के गृह विभाग ने इस संबंध में डीएम-एसपी को दिशा निर्देश जारी किया है.
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उठाया बड़ा कदम
सुप्रीम कोर्ट के वकील आर. के कपूर की माने तो जेल से रिहा न करना कही न कही उस कैदी के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा उठाया गया यह कदम सराहनीय है. देशभर के जेलों में 24879 ऐसे कैदी है, जो जमानत मिलने के बावजूद अभी भी जेल में बंद है. इनमें से 50 फीसदी कैदी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार के जेलों में बंद है. उत्तर प्रदेश में 6158 कैदी, मध्य प्रदेश में 4290 कैदी, बिहार के जेलों में 3345 कैदी, महाराष्ट्र में 1661 कैदी, केरल में 1134 कैदी, पंजाब एंड हरियाणा में 922 कैदी, असम में 892 कैदी और तमिलनाडु में 830 कैदी जेलों में बंद है. जबकि बिहार की 59 जेलों में 6,365 से अधिन विचाराधीन कैदी बंद है. जबकि जेलों की क्षमता 46669 कैदियों की ही है.
इन कैदियों में से 45000 कैदी अंदर ट्रायल है. जबकि 10000 कैदी सजायाफ्ता हैं. इसको लेकर बिहार सरकार द्वारा एक समिति गठित की गई है. समिति यह जांच करेगी कि जिन कैदियों को जमानत मिल चुकी है और पैसा के चलते वो जेल से बाहर नही आ रहे है क्या यह सही है या गलत. नियम के तहत जिला स्तर के समिति को यह अधिकार होगा कि वह विचाराधीन कैदी के लिए 40 हजार तक की राशि जमा करा सकती है. जबकि दोषी करार कैदी के लिए अधिकतम 25000 तक कि राशि मंजूर कर सकती है. अगर इससे अधिक जमानत राशि है तो मामला राज्य स्तरीय निगरानी समिति को भेजा जाएगा.
जेलों में सुधार और कैदियों की रिहाई संभव
बिहार सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग, एनडीपीएस (नारकोटिक्स), तथा असामाजिक गतिविधियों में शामिल कैदियों पर लागू नहीं होगी. ऐसे मामलों में सरकार कोई वित्तीय सहायता नहीं देगी. योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए राज्य स्तर पर एक पांच सदस्यीय निगरानी समिति और जिला स्तर पर अधिकार प्राप्त समिति का गठन किया गया है. देशभर की जेलों में कुल 488511 कैदी बंद हैं और इनमें से 37848 कैदी बंद हैं और इनमें से 371848 कैदी विचाराधीन हैं.
विचाराधीन कैदियों में लगभग 20 फीसदी, लगभग 73 फीसदी दलित, आदिवासी व ओबीसी हैं. इन कैदियों में 24 फीसदी दोषी व 76 फीसदी निरक्षर है या स्कूली शिक्षा छोड़ चुके लोग हैं. दिल्ली बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष मुरारी तिवारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जिन कैदियों ने अपनी सजा का एक तिहाई समय जेल में काट लिया हो, उन्हें जमानत शर्ते पूरी ने करने पर भी रिहा किया जा सकता है. हालांकि यह आदेश दुष्कर्म और हत्या जैसे गंभीर अपराधों में लागू नहीं होता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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