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Rajasthan Election Result: BJP और कांग्रेस.. किसी की नहीं बनी सरकार तो किसको समर्थन देगी BSP? मायावती ने कर दिया साफ

Rajasthan assembly election 2023: बसपा इकाई के अध्यक्ष ने यह साफ तो नहीं किया कि वह किसको समर्थन देंगे. हालांकि कांग्रेस पर आरोप लगाकर उन्होंने अपनी नाराजगी जरुर जता दी है.

बसपा सुप्रीमो मायावती

बसपा सुप्रीमो मायावती (फोटो फाइल)

Rajasthan Election Result: राजस्थान विधानसभा के नतीजों को लेकर बीजेपी और कांग्रेस में सीधी टक्कर है. वहीं न्यूज चैनल एजेंसियों के सर्वे भी अलग-अलग सामने आए हैं. ऐसे में यह दिलचस्प हो गया है कि प्रदेश में इस बार परिवर्तन होगा या नहीं. चुनाव में नतीजे आने में बस अब एक दिन का समय बचा हुआ हैं. अगर सर्वे के नतीजों की मानें तो कोई भी पार्टी प्रदेश में स्पष्ट सरकार नहीं बना रही है. ऐसे में निर्दलीय और छोटे दलों की अहम भूमिका रहने वाली है. इसके लिए बीजेपी और कांग्रेस ने उनके दरवाजे पर दस्तक देना शुरू कर दिया है.

वहीं इस बीच बसपा सुप्रीमो मयावात ने एक बड़ा ऐलान कर दिया है. उनके इस ऐलान के बाद ही बीजेपी और कांग्रेस को राहत मिली है, क्योंकि उन्होंने अपना समर्थन देने की बात तो कही है. हालांकि उन्होंने एक बड़ी शर्त भी रख दी है.

बसपा ने रख दी बड़ी शर्त

राजस्थान की बसपा इकाई के अध्यक्ष भगवान सिंह बाबा ने बताया कि हमारी पार्टी ने बताया कि हमारी ने प्रदेश में मजबूती से चुनाव लड़ा है और इस बार हमारे 6 उम्मीदवार जीतकर आने वाले हैं. हालांकि उन्होंने अपने बयान में यह साफ नहीं किया कि उनकी पार्टी किसको समर्थन दे सकती है. लेकिन बसपा इकाई अध्यक्ष ने कांग्रेस पर जरुर आरोप लगा दिया कि उन्होंने हमे 2008 और 2018 में धोखे में रखा था. उन्होंने हमारे विधायकों को तोड़ा और खरीद लिया.

भगवान सिंह ने बताया कि हमारी राष्ट्रीय अध्यक्ष मयावती ने साफ कहा है कि इस बार बिना शर्त किसी को समर्थन नहीं देंगे. अगर जीते हुए प्रत्याशियों को कैबिनेट में जगह दी जाएगी तभी वह किसी दल को समर्थन करेंगी.

बसपा किसको दे सकती है समर्थन

हालांकि बसपा इकाई के अध्यक्ष ने यह साफ तो नहीं किया कि वह किसको समर्थन देंगे. हालांकि कांग्रेस पर आरोप लगाकर उन्होंने अपनी नाराजगी जरुर जता दी है. इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि मायावती बीजेपी को भी अपना समर्थन दे सकती हैं. साल 2018 के चुनाव में बसपा ने कांग्रेस को अपना समर्थन दिया था. हालांकि बाद में वह सभी विधायक कांग्रेस में ही शामिल हो गए थे. इस

मायावती की पार्टी की और से इस ऐलान के बाद बीजेपी और कांग्रेस को राहत तो मिली है. वहीं उनकी इस शर्त ने दोनों की टेंशन को भी बढ़ा दिया है.

– भारत एक्सप्रेस

 

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